वैरी सेक्सी गर्ल हॉट स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मुझे गाँव में मेरे चाचा की साली मिली. उसने मेरे साथ शरारत की तो मैं भी उसकी चुदाई की ताक में था. मैंने उसे कैसे चोदा?

आज बहुत अरसे बाद अपनी एक मित्र के कहने पर आज अपनी वैरी सेक्सी गर्ल हॉट स्टोरी आप सबके साथ शेयर कर रहा हूँ. जिन लोगों ने मेरी पहली सेक्स कहानी नहीं पढ़ी है, उन्हें मैं एक बार फिर से अपना परिचय दे दूं.

मैं राज शर्मा (स्टोरी नाम) कानपुर से हूँ. ये कहानी उस वक़्त की है, जब मैंने जवानी की दहलीज पर कदम रखा था और गाज़ियाबाद में रहता था.

गर्मी की छुट्टियां शुरू हो रही थीं. हर बार की तरह इस बार भी हम कानपुर अपने पैतृक घर गए. जहां जाकर हमें पता चला कि हमारे दादा के छोटे भाई का देहांत हो गया है. जिस वजह से हमें अपने गांव जाना पड़ा. उधर सभी रिश्तेदार आए थे. नीरजा से मेरी मुलाकात वहीं हुई थी.

नीरजा छोटे दादा के बेटे, मतलब मेरे पापा के कजिन(मेरे चाचा लगे) की साली की बेटी थी. उसका फिगर ठीक था. उसने भी जवानी की दहलीज पर कदम रखा ही था. मैं बगीचे से आम और जामुन तोड़ कर लाता था, जो नीरजा को बहुत पसंद थे.

इससे हमारे बीच जान पहचान बढ़ने लगी. तेरहवीं की रस्म होने के भीड़ कम हो गई. नीरजा वहीं अपनी मौसी के साथ रुक गई.

मैं शुरू से ही हंसमुख स्वभाव का था. इसलिए मेरी उससे काफी घुटने लगी थी.

गांव में जल्दी ही अंधेरा हो जाता है. उस समय गांव में लाइट भी नहीं थी. शाम को मनोरंजन के लिए हम सब इकट्ठे होते कहानी किस्सों का दौर शुरू हो जाता.

ऐसे ही एक दिन मैं कहानी सुनाने लगा. सभी लोग छत पर दरी बिछा कर बैठे थे. मैं खाट पर बैठ कर कहानी सुना रहा था. नीरजा मेरे बहुत नजदीक बैठी थी. वो इतने पास थी कि मेरे पैर हिलते, तो नीरजा से टकरा जाते.

धीरे धीरे मुझे महसूस हुआ कि मेरे पैर नीरजा के पैरों के बीच में गए हैं बिल्कुल उसकी बुर से टच होते हुए.
मुझे ये महसूस करते ही हल्का झटका लगा.

मैंने अपना पैर हटाने की कोशिश की. तो नीरजा मेरे और नजदीक खिसक आई. जिससे मेरे पैर का अंगूठा नीरजा की बुर की दरार में गया. अब मेरे पास अपने पैर को हटाने की जगह नहीं बची थी. मेरा अंगूठा स्थिर था मगर नीरजा की कमर हिल रही थी जिससे वो मजा ले रही थी.

अंगूठा बुर में लग रहा था तो उसकी बुर का गीलापन भी मुझे गरमाने लगा था. मगर अभी सिर्फ अंगूठा ही चलाया जा सकता था. इसके आगे हम कुछ नहीं कर सकते थे.
अंधेरे के कारण किसी को कुछ दिखाई तो नहीं दे रहा था, मगर सुनाई सब दे रहा था. इसलिए मैं कुछ बोल भी नहीं पा रहा था.

सुबह नीरजा से आंखें मिलीं, तो पट्ठी अपनी मौसी के साथ थी. मुझे देख कर उसने मुँह फेर लिया और शरीफजादी बन गई. मैं भी लंड दबा कर रह गया.

उधर इसी तरह की पोजीशन बनी रही और हम दोनों में कोई बात हो सकी. पहले जो आम जामुन के चलते बातचीत हो जाती थी, अब वो भी नीरजा करने में सकुचा रही थी.

एक हफ्ते बाद हम सब वापस कानपुर गए.

कानपुर आने के बाद चाचा मुझे अपने घर ले गए. जहां नीरजा भी थी. चाची डिलीवरी के लिए अपने मायके गई थीं. जो पास में ही था.

चाचा के घर खाना बनाने के लिए नीरजा, चाचा के घर में गई थी. वहां सिर्फ मैं, चाचा, छोटे चाचा नीरजा ही थे.

सुबह नौ बजे चाचा मुझे घर पर छोड़ कर आफिस चले गए. छोटे चाचा अपने काम से निकल गए थे. घर में सिर्फ मैं और नीरजा ही थे. नीरजा नहाने के लिए बाथरूम में चली गई, जिसकी एक खिड़की हल्की खुली रहती थी. नीरजा ने अपने कपड़े उतारे और नहाने लगी.

मैंने खिड़की की झिरी से अन्दर देखा, तो अन्दर नीरजा बिल्कुल नंगी नहा रही थी. उसकी नंगी जवानी देख कर मेरे लंड में आग लगने लगी. मैं बस चुपचाप उसकी बुर और चूचियां देखते हुए अपने लंड को हिलाने लगा.

नीरजा जब नहा कर बाहर आने लगी, तो मैं कमरे में वापस गया.

चाचा के पास एक ही कमरा था. रात में मैं छोटे चाचा के साथ सोया था. दूसरे पलंग पर बड़े चाचा और नीरजा थे. गर्मी के कारण मैंने अपना पलंग पंखे के नीचे खिसका लिया, जिससे मेरे और नीरजा के बीच दूरी खत्म हो गई.

रह रह कर मुझे नीरजा की गांव की वो हरकत याद आने लगी. मेरी नींद उड़ गई थी. नीरजा मेरे बहुत नजदीक लेटी थी.

चूंकि आग लगाने की शुरुआत नीरजा ने की थी. मगर अब वो बिल्कुल घास नहीं डाल रही थी. मैं सोचा कि शायद ये मेरी तरफ से पहल का इंतजार कर रही होगी. ये सोच कर उस रात मुझसे रहा नहीं गया और मेरा हाथ नीरजा के टॉप के ऊपर उसके मम्मों पर चला गया.

मैंने पहले तो हाथ रखा और रुक गया. उसने कुछ हरकत नहीं की. तो धीरे धीरे मैं नीरजा के मम्मों को दबाने लगा.

कोई दो मिनट तक नीरजा की तरफ से कोई हरकत नहीं होने से मेरी हिम्मत बढ़ गई. मेरा हाथ नीरजा के टॉप के अन्दर घुस गया. नीरजा के निप्पल टाइट हो गए थे.

मैं नीरजा के दोनों मम्मों और निप्पलों को बारी बारी से मसलने लगा. नीरजा ने कोई विरोध नहीं किया, उसने सिर्फ अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया. लेकिन मेरे हाथ को हटाने की कोशिश नहीं की. ये मेरे लिए ग्रीन सिग्नल था.

मैं नीरजा के मम्मों को छोड़ कर उसकी बुर की तरफ गया. पहले पैंटी के ऊपर से बुर को हल्का रगड़ा, तो महसूस हुआ नीरजा की पैंटी गीली हो रही थी. मेरा हाथ बुर को महसूस करने लगा. नीरजा की पैंटी के अन्दर नंगी बुर पर गया. मेरे हाथ की उंगलियां नीरजा की बुर के होंठों को खोल कर अन्दर घुसने लगी, जिससे नीरजा गर्म होने लगी.

वो चाचा के साथ लेटी होने के कारण ज्यादा हिल नहीं सकती थी, आवाज कर सकती थी. उसने अपना हाथ अपने मुँह पर रख लिया.

मैं तेजी से उसकी बुर में उंगली कर रहा था, जिससे नीरजा की बुर ने पानी छोड़ दिया. मेरा हाथ नीरजा की बुर के पानी से गीला हो गया, जिसे मैंने नीरजा की पैंटी में ही साफ कर दिया.

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अगले दिन जब चाचा आफिस चले गए छोटे चाचा भी गांव चले गए थे. उनके जाने के बाद नीरजा फिर से नहाने गई. तो वो टॉवल, कमरे में ही छोड़ कर बाथरूम में घुस गई.

मैं फिर से नीरजा को नंगा नहाते देखने लगा. जब नीरजा नहा चुकी, तो उसने मुझे टॉवल देने को बोला.

जब मैंने पूछा- टॉवल लेकर क्यों नहीं गई थीं?
तो वो बोली- कपड़े धोने थे तो टॉवल टांगने की जगह नहीं थी.

मैं हाथ बढ़ा कर टॉवल नीरजा को देने लगा, जिसके लिए नीरजा ने हल्का सा दरवाजा खोला. लेकिन नीरजा के नंगे जिस्म की हल्की झलक मुझे मिल ही गई.

नीरजा बदन को पौंछ कर बाहर आई और अपने बालों को झटका, तो पानी की बूंदें मेरे चेहरे पर टकरा गईं.

थोड़ी देर पहले ही मैंने नीरजा की नंगी नहाते देखा था. मैंने नीरजा को पकड़ लिया.

और रात के बारे में कुछ बोलता, इससे पहले ही नीरजा बोल उठी- राज मुझे छोड़ो, खाना बनाना है मुझे.
वो मेरा हाथ झटक कर किचन में घुस गई.

मैं भी झिझक के मारे उससे कुछ ज्यादा कह सका. अब तक दोपहर के 12 बज गए थे. चाचा के लंच के लिए आने का टाइम हो रहा था. इसलिए मैंने भी कुछ नहीं किया.

आज चाचा भी दस मिनट पहले ही गए थे. मैं उनके सामने खटिया पर लेटा हुआ एक किताब पढ़ रहा था.

चाचा ने मुझसे कुछ नहीं कहा. वो लंच करके फिर से चले गए.

अब मेरे पास पूरा टाइम था.

नीरजा और मैं लंच करके बेड पर आराम करने लगे. नीरजा मेरे साथ बेड पर लेटी थी. उसके हाथ में मैगज़ीन थी. मेरा ध्यान सिर्फ नीरजा के जिस्म पर था. आग दोनों तरफ लगी थी, लेकिन शुरू मुझे ही करना था.

मैंने अपना हाथ नीरजा के मम्मों पर रखा और नीरजा को अपनी तरफ चिपका लिया.

नीरजा- ये क्या कर रहे हो राज?
मैं- तुम्हें प्यार कर रहा हूँ.

नीरजा- पागल हो क्या?
मैं- पागल तो तुमने गांव में ही कर दिया था, जब मेरा पैर तुमने अपने पैरों के बीच में दबा लिया था. वक़्त और मौका नहीं मिला थाऔर ही तुमने मुझे कुछ करने दिया था.
नीरजा इठला कर बोली- अच्छामौका मिलता तो क्या करते?
मैं- कल रात में जो किया था, क्या भूल गई उसे?

नीरजा- रात को तुमने ठीक नहीं किया. मौसाजी जाग जाते तो!
मैं- मुझे पता था तुम ऐसा कुछ नहीं करोगी कि चाचा जग जाएं और तुमने वही किया. वैसे रात में पानी बहुत निकाला था.
नीरजा- तुमने इतना गरम कर दिया था, तो पानी तो निकलता ही. फिर तुम उंगली इतनी जल्दी जल्दी कर रहे थे, तो मुझसे रहा ही गया.

मैं- रात में दिखा नहीं था, कैसे पानी निकला!
नीरजा- तो अब क्या करने का इरादा है?
मैं- जो रात में नहीं हुआ थावो!
नीरजा- रात में क्या नहीं हुआतुमने बुर में उंगली घुसा दी, मेरा पानी निकाल दिया और क्या चाहिए तुम्हें?

उसके मुँह से बुर शब्द सुनते ही मैंने नीरजा का गाउन ऊपर कर दिया. उसके ब्रा के साथ ही उसके गाउन को निकाल दियाऔर नीरजा के मम्मों पर टूट पड़ा.

नीरजा भी मस्ता गई. मैं उसके मम्मों मसलने और चूसने लगा.

नीरजा- आह राजदर्द हो रहा है इतनी जोर से कर रहे हो!
मैं- दर्द तो रात में भी हो रहा था, तब कुछ नहीं बोलीं. अभी तो दर्द की शुरुआत है जान.
नीरजा- ऐसी शुरुआत हैतो अंत कैसा होगा. प्लीज धीरे करोआंह निप्पल इतनी तेज मत खींचो यारलगती है. रात में भी तुमने तेज मसल दिए थे, बहुत दर्द हो रहा था.
मैं- दर्द के साथ मजा भी तो ले रही थीं.
वो हंस दी.

मैं नीरजा के मम्मों और निप्पलों को बेदर्दी से चूस रहा था. मेरा एक हाथ नीरजा की पैंटी के अन्दर घुस गया और नीरज की बुर की फांकों को खोल कर उंगली नीरजा की गीली हो चुकी बुर की गहराई नापने लगी.

नीरजा ने अपनी टांगें खोल दीं- उफ्फ राजतुमने मेरी बुर में आग लगा दीआंहबहुत अच्छा लग रहा है. ऐसे ही करते रहो.
मैं- आज तो तेरी बुर का पानी निचोड़ लूंगा.
नीरजा- सिर्फ उंगली से ही करते हो या कुछ और भी करते हो.
मैं- पहले उंगली से तेरी बुर की गहराई तो देख लूं.

नीरजा का हाथ मेरी लुंगी के अन्दर छिपे लंड पर चला गया. उसने मेरी लुंगी हटा दी और नीरजा मेरे लंड को मसलने लगी.

नीरजा- तेरा लंड तो बहुत गर्म है. बहुत मस्त हैजल्दी से इसे मेरी बुर के अन्दर डाल देमेरी बुर लंड की