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कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार


 

कुँवारी बुर की चुदाई पहली बार

कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की ने अपनी कामवासना से मजबूर होकर अपने कमसिन जिस्म को मेरे हवाले कर दिया.

हाय दोस्तो, मेरा नाम सुमीत शर्मा है। वैसे तो मैं दतिया का रहने वाला हूं लेकिन मेरी जॉब के कारण फिलहाल इंदौर में रहता हूं। मेरी ऊंचाई 5 फुट 8 इंच है।


मेरी शादी को दो साल हो चुके हैं। मेरी बीवी बहुत सुंदर है और मेरा बहुत खयाल रखने वाली है। हमारा वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा चल रहा है। में और मेरी बीवी शुरू से ही सेक्स का पूरा मजा लेते हैं। हमने कई तरीके से और नई-नई जगह चुदाई करने का मजा लिया है। जैसा कि मैंने आपको बताया कि मेरी जॉब घर से दूर है तो मैं यहां अपनी बीवी के साथ ही रहता हूँ।


यह कहानी 6 महीने पुरानी है। हमारे घर के सामने एक थोड़ा ग़रीब परिवार रहता है, परिवार में चार सदस्य हैं पति, पत्नी, उनकी बेटी सोनम जिसकी उम्र 19 साल है और छोटा बेटा पंकज जिसकी उम्र 11 साल है।

मैं जॉब के कारण दिनभर बाहर ही रहता हूँ इसलिये मेरी बीवी बाजार के छोटे मोटे काम के लिए सोनम को ही बुला लेती है। और सोनम भी खुशी खुशी उसकी सहायता के लिए आ जाती है।

हम इस घर में 2 साल पहले ही आये थे। तब मैंने सोनम पर कभी इतना ध्यान नहीं दिया था।

पर कुछ दिन पहले जब मैं ड्यूटी के लिए निकल रहा था तो सामने से आ रही सोनम को देखा। उसके स्तन 32 के भरे पूरे सुडौल हो चुके थे और उसकी गांड 36 की हो गई थी। सोनम को देखकर मुझे विश्वास नहीं हुआ कि ये वही सोनम है जो मेरे यहाँ आने पर दुबली पतली हुआ करती थी। मैं समझ गया सोनम का शरीर अपनी जवानी के पूरे उफान पर है।


कुछ दिन बाद मेरी बीवी को मेरी सास की तबियत खराब होने के कारण अपने मायके जाना पड़ा। मैं उसको घर छोड़कर वापस आ गया। सोनम के घर में टी वी न होने के कारण सोनम और उसका भाई लगभग रोज ही हमारे घर टी वी देखने आया करते थे। सोनम के परिवार और हमें किसी को कोई आपत्ति नहीं थी इसलिए ये लोग देर रात 11-12 बजे तक टी वी देखते रहते थे।

उस दिन भी सोनम और उसका भाई टी वी देखने आए हुए थे। मेरी बीवी के न होने के कारण में अकेला था। उस दिन सोनम के भाई को 10 बजे ही नींद आने लगी और वो सोने के लिए घर चला गया।

अब घर में केवल में और सोनम ही थे।

जब तक हमें इस बात का अहसास न हुआ, तब तक सब नार्मल रहा। लेकिन जब हमें इस बात का अहसास हुआ कि मैं और एक जवान लड़की रात में अकेले मेरे घर में हैं तो हम दोनों ही थोड़े असहज हो गए। लेकिन हम दोनों ही सामान्य दिखाने की कोशिश करते रहे और टी वी पर आ रही फिल्म को एन्जॉय करते रहे।


उस दिन टी वी पर आ रही फिल्म भी कुछ ज्यादा ही कामुक दृश्यों से भरी हुई थी। फ़िल्म में हीरो हिरोइन एक दूसरे को फ़्रेंच किस कर रहे थे और एक दूसरे के कपड़ों में हाथ डाल रहे थे। ये सब देखकर मेरा बुरा हाल था और शायद सोनम भी मुश्किल से अपने आप को सामान्य दिखा पा रही थी।


मेरा लंड पैंट के अंदर खड़ा हो चुका था और थोड़ा थोड़ा लीक कर रहा था। जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैं उठकर बाथरूम चला गया और मुठ मार कर अपनी वासना को शांत किया।

जब मैं बाथरूम से वापस आया तो देखा सोनम अपने सलवार में हाथ डाल कर अपनी बुर को सहला रही है। मैं समझ गया कि ये लड़की अपनी बुर की चुदाई के लिए तड़प रही है.

मुझे वापस आया देखकर उसने तुरंत अपना हाथ निकाल लिया और फिर से सामान्य दिखने की कोशिश करने लगी।

पर अब अपनी बुर को छेड़ने के कारण वो अपनी तेज साँसों पर नियंत्रण रखने में असमर्थ थी। उसकी तेज सांसें मुझे उसके अंदर लगी वासना की आग का पूरा हाल बयान कर रही थी।

अबकी बार मैं जान बूझ कर सोनम के बिल्कुल पास ही बैठा और उसकी जांघ पर हल्के से हाथ रखकर हटा लिया। इस पर उसने कोई रिस्पांस नहीं दिया।

सच कहूं तो मेरी भी बिल्कुल हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि आज तक मैंने अपनी बीवी के अलावा किसी और लड़की को वासना की नजर छुआ भी नहीं था। लेकिन आज सोनम को अपने पास पाकर मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। मैं किसी भी हालत में आज सोनम को अपना बनाना चाहता था।

इसीलिए मैंने एक बार और हिम्मत करके अपना एक हाथ उसके कंधे पर रखकर हल्के से दबा दिया। इस बार मेरा प्रयास सफल हुआ, सोनम ने लंबी सांस लेकर अपना सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। उसने एक बार आशा भरी नजरों से मेरी आँखों में देखा और अगले ही पल टी वी पर चल रहे सेक्सी सीन को देखने लगी।


फिर कुछ देर बाद बोली- अंकल जी, क्या शादी के बाद सब ऐसा ही करते हैं?

मैंने उसके होंठों पर उंगली रखते हुए कहा- अंकल जी मत बोलो … केवल सुमीत कहो।

उसने हल्की सी स्माइल दी, फिर पलट कर अपना सर मेरे सीने में गड़ाते हुये मुझे हग कर लिया।


मैंने भी उसे कस कर अपने सीने में दबा लिया। अब मैं उसके बड़े बड़े स्तनों को अपने सीने पर महसूस कर सकता था।


अब मैंने उसके मुंह को थोड़ी पकड़ कर उठाया और उसके होंठों को अपने होंठों पर लगा कर किस करने लगा, वो भी मेरा साथ दे रही थी।

चुम्बन करते करते मैंने उसके कुर्ते में पीछे से हाथ डाल दिया और उसकी पीठ सहलाने लगा। शायद अब तक पहली बार किसी मर्द ने उसके होंठों और उसकी नंगी पीठ को छुआ था इसलिए इस अद्भुद आनन्द के कारण उसकी आंखें बंद हो गई और वो सिसकारियाँ लेने लगी।

कुछ देर बाद उसे अहसास हुआ कि वो वासना में बहक गई है और उसने मुझे रोका, बोली- सुमीत जी रहने दीजिए ना!

लेकिन मना करते हुए भी वो मर्द के स्पर्श से प्राप्त आनन्द को भुला नहीं पा रही थी इसलिए मना करते हुए उसकी आवाज में आत्मविश्वास की कमी थी।


मैंने उससे पूछा- क्या हुआ सोनम?

वो बोली- रात के 10:30 बज चुके हैं। कहीं किसी को पता चल गया तो मेरी बहुत बदनामी होगी.

और यह कहते हुए उसकी आँखों में आंसू आ गए।

मैंने उसके माथे पर चूमते हुए उससे कहा- सोनम, तुम चिंता मत करो, तुम्हारी बदनामी मेरी बदनामी है. इसलिए किसी को कुछ पता नहीं चलेगा. और वैसे भी तुम 12 बजे तक तो टी वी देखती ही हो. लेकिन अगर फिर भी तुम डरती हो तो रहने दो, मैं कोई जबरदस्ती नहीं करूँगा।


मेरी बातों से उसका डर कम हो गया और वो एक बार फिर मेरी बांहों में आ गई। अब मैंने उसके पूरे चेहरे को चूमना शुरू किया उसके कानों की लौ को किस किया और कपड़ों के ऊपर से पीठ को सहलाता रहा।


मैंने कपड़ों के ऊपर से ही उसके बूब्स को सहलाना शुरु किया. उस पर सेक्स का शुरूर चढ़ रहा था और उसकी तेज साँसें इसका सबूत दे रही थीं। ऊपर से सहलाने के बाद मैंने उसके कुर्ते में ऊपर से हाथ डालकर उसके बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाया. कोई विरोध न होने पर मैंने उसकी ब्रा को कुर्ते के अंदर ही ऊपर उठाकर उसके नंगे स्तन को अपने हाथ में लेकर दबाया।

पहली बार किसी मर्द के द्वारा अपने स्तन को छूने के अहसास से वो सिहर उठी और उसकी साँसें पहले से भी ज्यादा तेज हो गयीं।


अब मैंने देर न करते हुये उसके कुर्ते को कमर से पकड़कर उतारने के लिए उठाया। सोनम मेरा हाथ पकड़कर धीरे से बोला- रहने दो ना प्लीज।

लेकिन उसकी आवाज में असहमति नहीं बल्कि एक लड़की की शर्म थी।

मैंने उसका हाथ हल्के से हटाकर उसके कुर्ते को फिर उठाया. इस बार सोनम ने दोनों हाथ उठाकर कुर्ता निकालने में अपना सहर्ष सहयोग प्रदान किया। अब मेरे सामने उसका एक नंगा स्तन था जो गोल मटोल सुडौल तथा निप्पल पर हल्के भूरे रंग का था, उसके निप्पल देखकर मुझे अपनी सुहागरात याद आ गई।

उसके निप्पल बहुत ही सुंदर थे।

अब मैंने देर न करते हुए उसके निप्पल को चूसना शुरू कर दिया। इस अद्भुत अहसास के रोमांच से उसका हाथ अपने आप ही मेरे सर पर सहलाने लगा। सोनम ‘और चूसो … और चूसो!’ बड़बड़ाने लगी।


मैंने स्तन चूसते चूसते उसकी सफेद ब्रा को उसके शरीर से अलग ही कर दिया। अब वो ऊपर से पूरी नंगी थी। मैं बारी बारी से उसके दोनों स्तनों को चूस रहा था और वो इस असीम आनन्द में गोते खा रही थी।

अब में उससे अलग हुआ, ऊपर से नीचे तक उसको देखा।

उसने स्त्रीसुलभ लज्जा से अपनी आंखें अपने हाथों से बंद कर ली।

मैंने उसके हाथों को आंखों से हटाकर उसको किस किया और उसे गले लगाकर बोला- आई लव यू सोनम!

सोनम ने भी ‘आई लव यू टू!’ सुमीत बोलकर मुझे किस किया।

तब मैं उसे उठाकर अपने बेड पर ले गया और बहुत प्यार से उसे वहां लिटाया। बेड पर ऊपर से नंगी सोनम किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।

अब मैंने अपने अंडरवियर को छोड़कर बाकी सारे कपड़े निकाल दिए।

सोनम मेरी छाती के बालों को देखकर मंत्रमुग्ध हो गयी।

मैं सोनम के बगल में लेट गया और उसको ऊपर से नीचे तक चुम्बन करने लगा। उसके बूब्स को पीने के बाद उसकी नाभि को चूमा। वो बस आंख बंद करके आहें भर रही थी।


अब मैंने उसके सलवार का नाड़ा ढीला किया और सलवार को नीचे की तरफ खींचा. उसने अपनी गांड उठाकर सलवार निकलने में अपना सहयोग दिया।

अब वो केवल पैंटी में थी।

उसकी पैंटी भूरे रंग की थी तथा इलास्टिक के पास थोड़ी फटी हुई थी। उसके काम रस के कारण उनकी पैंटी बुर के पास पूरी भीग चुकी थी। कुँवारी बुर की चुदाई के लिए तैयार हो रही थी.

मैंने उसकी बुर की दरार में लगे उसके काम रस को पैंटी के ऊपर से ही चाटा तो वो चिंहुक उठी और गांड उठाकर मजे लेने लगी

अब मैंने अपनी दो उंगली उसकी पैंटी की इलास्टिक में पैंटी उतारने के लिए डाली। उसने पैंटी को पकड़कर अपनी बुर को नंगा होने से रोका, बोली- ये मत करो ना!

मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा उसके चेहरे पर डर और शर्म के भाव साफ दिखाई दे रहे थे।


सोनम के चेहरे का ये भाव, डर समाज की बदनामी का नहीं बल्कि उसकी पहली चुदाई का था। मैंने उसके हाथ को हल्के से हटाकर उसकी पैंटी को धीरे से निकाला।

उसने अपने कूल्हे थोड़े से उठाकर अपना विरोध खत्म करते हुए पैंटी भी निकल जाने दी।

अब वो पूरी नंगी मेरे सामने पड़ी हुई थी।

उसकी बुर थोड़ी उभरी हुई तथा हल्की सी सांवली थी, उसकी छोटी छोटी झांटें बुर रस में भीगी हुई चमक रही थी. बुर के होंठ एक दूसरे से चिपके हुए थे। बुर की दरार ऐसी थी जैसे किसी ने पेंसिल से बना दी हो।


उसकी बुर को देखकर समझ गया था कि सोनम के बाद उसकी प्यारी बुर को देखने वाला पहला खुशनसीब इंसान मैं ही था।

मैंने सोनम की बुर को चूम कर के उसकी मुंहदिखाई उसे दी.


बुर पर चुम्बन से सोनम की साँस एक बार फिर तेज हो गई।

अब मैंने अपना अंडरवियर भी निकाल दिया औऱ सोनम को सलामी दी रहे अपने 8 इंच के लंड को सोनम के हाथों में दे दिया। सोनम ने कांपते हुए हाथों से मेरे लंड को पकड़ा।

सोनम ने लंड को आगे पीछे करके अच्छी तरह देखा जैसे कोई इंसान किसी नई चीज को पहली बार देखता है और लंड के सुपाड़े को किस करके छोड़ दिया।


अब मैं नीचे आया और सोनम के पैरों के बीच टांगों को फैलाकर बैठ गया। मैंने अपनी जीभ बुर की दरार में डाल दी और उसकी बुर को चूसना शुरु कर दिया।

बुर पर हुये इस हमले से सोनम पागल होने लगी और मेरे बालों को पकड़कर अपनी बुर पर दबाने लगी.

वैसे भी मेरी बीवी कहती है कि मैं बुर बहुत अच्छी चूसता हूँ।

थोड़ी देर बुर चुसवाने के बाद सोनम का अपने ऊपर कंट्रोल खत्म हो गया ‘और चाटो … चूसो … पी जाओ मेरा पूरा पानी … लाल कर दो मेरी बुर को चूस चूस के …’ ये सब बड़बड़ाने लगी।


थोड़ी देर में सोनम बुर की चुदाई के लिए गिड़गिड़ाने लगी और बोली- प्लीज चोद दो मुझे, नहीं तो मैं मर जाऊँगी. प्लीज … प्लीज … प्लीज … चोद दो न मुझे … फाड़ दो मेरी बुर को … अब सहन नहीं होता।

बर की चुदाई

मैंने भी अब कुँवारी बुर की चुदाई में और देर करना ठीक नहीं समझा और अपना लंड उसकी बुर के छेद पर टिका दिया। सोनम की बुर के रस और मेरे लंड के प्रिकम के कारण चिकनाई की कोई कमी नहीं थी।

सोनम को मैंने बोला- आज तुम्हारा पहली बार है तो थोड़ा दर्द होगा, बाद में मजा आएगा।

उस प्यासी जवानी के अंदर चुदाई की आग लगी हुई थी, उसने बोला- सुमीत आप देर मत करो, बस फाड़ दो, मेरी बुर को सारा दर्द मैं सह लूँगी।

मैंने सोचा ‘ठीक है मुझे क्या करना … जब ये बोल ही रही है तो!’ मैंने लंड को बुर के छेद पर सेट करके हल्का का धक्का लगाया.

सोनम को थोड़ा सा दर्द हुआ और उसकी आह निकल गई लेकिन फिर भी वो बोली- सुमीत प्लीज जल्दी करो … फाड़ दो मेरी बुर को।

दोबारा मैंने देर न करते हुये, अपने दोनों हाथों को सोनम के कंधों पर टिकाकर जोरदार धक्का दिया, मेरा आधा लंड सोनम की कौमार्य झिल्ली को फाड़ता हुआ उसकी बुर में समा गया और वो दर्द के कारण बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी।

सोनम गिड़गिड़ाने लगी- सुमीत प्लीज छोड़ दो मुझे … मुझे कुछ नहीं करना, मैं मर जाऊंगी।

उसकी बुर सच में फट चुकी थी और उसमें खून बह रहा था जो मेरे लंड को गीला कर चुका था।

मैंने सोनम को उसकी बुर के बारे में कुछ नहीं बताया, नहीं तो वो मुझे आगे नहीं बढ़ने देती।

मैं उसी अवस्था में लेटे लेटे उसके बूब्स को सहलाता रहा। जब उसका दर्द कम हो गया तो मैं अपने आधे ही लंड को अंदर बाहर करने लगा।

थोड़ी देर बाद उसे मजा आने लगा, तब मैंने उसे बताया कि अभी आधा ही लंड अंदर गया है। अगर वो कहे तो पूरा डाल दूँ।

सोनम बोली- अब दर्द तो नहीं होगा?

मैंने कहा- थोड़ा सा होगा। लेकिन यह दर्द एक बार हर लड़की को सहना ही पड़ता है। आज के बाद दर्द नहीं होगा, केवल मजा आयेगा।

उसने कहा- ठीक है लेकिन आराम से डालना।

मैंने ओके बोला. पर मुझे पता था कि लंड कैसे डालना है।

मैंने कुछ देर और आधे लंड को अंदर बाहर किया और उसके बूब्स से खेलता रहा।

जब मुझे लगा कि अब सोनम सामान्य हो चुकी है और दर्द सहने के लिये तैयार है. तब मैंने अपने दोनों हाथों से उसके कंधों को दबाया और पूरी ताकत से अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया।

लंड बुर की सारी दीवारों को फाड़ता हुआ सीधा बच्चेदानी से टकराया।

सोनम की चीख निकल गयी, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं, शरीर अकड़ गया और वो दर्द के कारण लगभग बेहोश हो गई.


मैं डर गया और कुछ देर तक उसी अवस्था में उसके ऊपर लेटा रह के उसे सहलाता रहा. कुछ देर बाद जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किये।

जब उसे भी मजा आने लगा तो वो भी चूतड़ उठाकर चुदाई में अपना सहयोग देने लगी। अब मैं उसे पूरे जोर से चोद रहा था, मेरा लंड उसकी बच्चेदानी से टकरा रहा था। अब उसका दर्द बिल्कुल खत्म हो गया था। वो आह आह करके अपनी पहली चुदाई का पूरा मजा ले रही थी।

करीब 10 मिनट की हाहाकारी चुदाई के बाद सोनम और मैं एक साथ झड़े।

मैंने उसे किस किया और बगल में लेट गया। कुँवारी बुर की चुदाई हो चुकी थी.


उसने अपनी बुर देखी तो पूरी सूज गयी थी। बुर से उसके पानी और मेरे वीर्य का मिश्रण निकल रहा था और उसके खून से बेडशीट पर बहुत बड़ा धब्बा पड़ गया था।

खून देखकर वो डर गई तो मैंने उसे समझाया- हर लड़की के पहली बार खून आता है इसमें कोई डर की बात नहीं है।

उसकी बुर में बहुत दर्द हो रहा था जिसके कारण जब वो उठ कर चली तो वो लंगड़ा के चल पा रही थी। मैंने उसे एक दर्दनिवारक गोली दी और कहा- अब तुम घर जाओ क्योंकि रात के 12 बज चुके हैं. कहीं किसी को शक न हो जाये।

वो घर चली गयी।

अगले दिन मैंने उसे एक गर्भ निरोधक लाकर दी।

इस घटना के बाद भी सोनम हमारे घर आती रही लेकिन वो सब फिर कभी नहीं हुआ क्योंकि मुझे सोनम की बदनामी का डर था।


अभी 2 महीने पहले सोनम की शादी हो गई। मैंने उसकी शादी में उसके पिताजी की बहुत सहायता की।

सोनम जब भी मायके आती है तो हमारे घर मेरी बीवी से मिलने जरूर आती है और मुझे मुस्करा के नमस्ते करती है।

वो अपने ससुराल में बहुत खुश है और मैं भी उसे खुश देख कर खुश हूँ.

दोस्तो, यह मेरी पहली और सच्ची कहानी है। कुँवारी बुर की चुदाई की कहानी आपको कैसी लगी,

सेक्स स्पेशलिस्ट डॉक्टर का इलाज

सेक्सी नर्स सेक्स कहानी में पढ़ें कि मैं इलाज के लिए सेक्स स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास गया तो वहां मुझे वीर्य का नमूना देना था. डॉक्टर ने नर्स को मेरी मदद करने को कहा.

दोस्तो, ये एक काल्पनिक सेक्स कहानी है. इस कहानी उद्देश्य किसी भी व्यक्ति या किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है.

मेरा नाम विक्रम है. आज मैं आप सबको अपनी जिंदगी के सबसे अनमोल लम्हों के बारे में बताने जा रहा हूँ, उम्मीद है कि आप सबको यह कहानी पसंद आएगी.

ये सेक्सी नर्स सेक्स कहानी 2019 की है, जब मैं 12वीं की परीक्षा की तैयारी कर रहा था.

वैसेमैं झारखंड से हूँ और रांची शहर से अपनी पढ़ाई कर रहा था.

मैं एक किराए के रूम में रहता था और एक पार्ट टाइम जॉब भी करता था.

इससे मुझे अपनी जेब खर्च में मदद मिल रही थी.


दिखने में मैं आकर्षक हूँ पर मेरा शरीर सामान्य सा ही है. मैं दिमाग से बहुत तेज हूँ, इसलिए लोग मुझे जल्दी ही पसंद कर लेते हैं.

मैं अपनी पढ़ाई कर रहा था और अपना काम भी करता था.

जवानी झूम कर आई हुई थी तो मुझे सेक्स की जरूरत थी.

पर मैं किसी से बोल नहीं सकता था इसलिए मैं मुठ मारकर अपने आपको खुद ही शांत कर लिया करता था.

यही मुठ मारना मेरे लिए मुसीबत बनती जा रही थी. मैं जल्दी नहीं झड़ पाता था और ज्यादा देर तक मुठ मारने से मेरे अंडकोष में दर्द होने लगता था.

मैं सोच रहा था कि ऐसा क्या करूं, जिससे मेरे अंडकोषों में दर्द न हो.

उसी बीच मेरे एक दोस्त ने मुझे एक डॉक्टर के बारे में बताया, जो एक सेक्स स्पेशलिस्ट थे.

उनका नाम मुहम्मद जावेद अख्तर था.

मैं उनके पास गया.

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि किसी व्यस्त डॉक्टर के पास जाने पर आपको नम्बर लगाना होता है.

मुझे दो दिन बाद का नम्बर मिला तो मैं ठीक दो दिन बाद डॉक्टर साहब से मिलने पहुंचा.

डॉक्टर साहब दिखने में बहुत हट्टे-कट्टे मर्द थे लेकिन शक्ल से मादरचोद लगते थे.

मैं- गुड मॉर्निंग डॉक्टर साहब, क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ?

डॉक्टर साहब- हां आ जाओ, बताओ क्या समस्या है?


मैं हिचकिचाते हुए बोला- वो डॉक्टर साहब मुझे अपने अंडकोषों में दिक्कत है, मुझे वहां पर दर्द होता है.

डॉक्टर साहब- ओह तो ये बात है, अच्छा बताओ कब और कैसे दर्द होता है, क्या तुम्हें पेशाब करते वक्त दर्द होता है या फिर सेक्स करते वक्त … तुम आराम से बताओ. घबराओ और शर्माओ मत, खुल कर बताओ

मैं- वो डॉक्टर साहब मैं सेक्स नहीं करता हूँ. मैं अभी तक वर्जिन हूँ, पर मैं मुठ बहुत ज्यादा मारता हूँ और मुठ मारते वक्त ही ज्यादा दर्द होता है.

डॉक्टर साहब- ओह तो ये बात है, विक्रम तुम घबराओ मत, ये नार्मल है. ऐसा दर्द बहुत लोगों में पाया गया है. मैं अभी चैक करके देखता हूँ.

उसी वक्त डॉक्टर साहब ने अपनी सहायिका को बुलाया, जो दिखने में एक परी जैसी थी. उसका नाम गुलनाज़ था.

गुलनाज़ आई और बोली.

(मैं गुलनाज़ को इस कहानी में गुल्लू बोलूंगा, मुझे ये कहना अच्छा लगता है.)

गुल्लू- यस सर!

डॉक्टर साहब- विक्रम को वहां लेटाओ.

गुल्लू मेरी तरफ देखती हुई- विक्रम जी, यहां आइए.

मैं वहां लेट गया, पर मेरे मन में बहुत से सवाल थे कि आखिर ये लड़की क्या करेगी.

क्या डॉक्टर साहब मुझे इसके सामने ही नंगा करेंगे.


मैं यही सब सोच रहा था और मेरा लंड गुल्लू को देख कर अकड़ रहा था.

पर मैं क्या करता, डॉक्टर ने खुद ही कहा था कि शर्माओ नहीं.

मैं वहीं लेटा रहा.

डॉक्टर साहब और गुल्लू दोनों मेरे पास आ गए. दोनों ने हाथों पर दस्ताने पहने हुए थे.


जावेद जी ने गुल्लू को मेरी पैंट खोलने को कहा.

गुल्लू ने डॉक्टर की तरफ देखते हुए ओके सर कहा.


मैंने सर को बोला- सर, लड़की के सामने कैसे!

जावेद जी- चुप रहो … जैसा मैं बोल रहा हूँ, वैसा ही करो … ओके.

उन्होंने थोड़ा सख्ती दिखाते हुए कहा तो मैं चुप हो गया.


गुल्लू ने मेरे पैंट को पूरा निकाल दिया और मेरे हाफ पैंट को थोड़ा नीचे करते हुए बोली- सर हो गया.

जावेद जी- मैंने कहा है उसका पैंट खोलो, ये नहीं कहा कि आधा खोलो.


गुल्लू ने सिर नीचे करके मेरा हाफ पैंट भी पूरा उतार दिया. शायद गुल्लू भी शर्मा रही थी.

और शर्माए भी क्यों नहीं, मेरा लंड भी पूरे आकार में खड़ा था. मेरा लंड ऐसे अकड़ा हुआ था मानो मैं सेक्स की गोली खाकर आया हूँ.


जावेद जी ने मेरे लंड को एक हाथ से दबाया, जिससे मुझे थोड़ा दर्द हुआ क्योंकि मेरा लंड पूरा खड़ा था.


फिर उन्होंने मेरे एक अंडकोष को एक हाथ से छूकर देखा. फिर गुल्लू को साइड में बुला कर उससे कुछ कहा.


गुल्लू मेरे पास आई, उसने मुझे मेरा पैंट दे दिया और कहा- मेरे साथ आओ.

मैं गुल्लू के पीछे चला गया गुल्लू मुझे एक कमरे में ले गई और मुझे नंगा होने को बोला.


मैं नंगा हो गया तो उसने बेड पर बैठने को कहा. मैं भी एक आज्ञाकारी बालक की तरह उसकी हर बात को मान रहा था.

गुल्लू ने एक स्केल निकाला और मेरे लंड का आकार पता करने लगी.



उसी वक्त मैं बोला- रुको एक मिनट, मेरा लंड अभी और ज्यादा खड़ा होगा.

गुल्लू ने मुस्कुराते हुए कहा- ओके जल्दी करो … मुझे और भी काम हैं.


मैं गुल्लू के सामने ही अपना लंड हिलाने लगा. कुछ ही सेकेंड में मेरा लंड पूरे आकार में आ गया.

गुल्लू स्केल लेकर लंड का नाप लेने लगी. पर उसके हाथ से बार बार मेरा लंड फिसल जा रहा था.


मैंने कहा- एक हाथ से लंड पकड़ कर नाप लो.

गुल्लू गुस्सा दिखाती हुई बोली- मुझे मत सिखाओ.


सच बताऊं तो वो किसी पोर्न स्टार से कम नहीं लग रही थी.

गुल्लू ने लंड का नाप लिया और एक पेपर में लिखा.


शायद उसने 9″ से कुछ ज्यादा ही नाप लिखी थी, पर मेरा लंड थोड़ा टेड़ा था.


गुल्लू ने मुझे एक कप दिया और कहा- इसमें अपना निकाल दो.


मैं घबराते हुए- क्या निकाल दूँ?

गुल्लू- अपना माल.


मैं- और इसका तुम क्या करोगी?

गुल्लू- मुझे नहीं पता, डाक्टर ने कहा है. उन्हें लैब में कुछ टेस्ट करना है.


मैंने ओके कहा और वो कप ले लिया.

मैं अपना लंड हिलाने लगा पर मेरे लंड में तो मानो कुछ भी नहीं हो रहा था, बस मैं लौड़ा हिलाए जा रहा था.


गुल्लू- जल्दी करो!

मैं- क्या करूं, निकल ही नहीं रहा है, अगर तुम कुछ मदद करो तो शायद जल्दी निकल जाए.

गुल्लू- ओके.


गुल्लू ने अपना एक हाथ से ग्लब्स को निकाला और मेरे लंड को शताब्दी एक्सप्रेस की तरह हिलाने लगी.

मेरे मुँह से कामुक सिसकारियां निकल रही थीं- आह आह … आह बस ओह यस अब निकल जाएगा ओह.




फिर पता नहीं, कब सिसकारियां दर्द में बदल गईं. मैंने एक झटके में गुल्लू को अपने से दूर कर दिया.


गुल्लू- क्या हुआ, मैंने कुछ गलत कर दिया क्या!

मैं- नहीं, वो बस मुझे मुठ मारते वक्त बहुत दर्द होता है. पर अगर तुम इसे चूसोगी, तो शायद दर्द न हो.


गुल्लू- अच्छा, तो अब मैं इसे चूसूं और फिर तुम बोलोगे शायद चोदने से ये दर्द ठीक हो जाए, तो मुझसे चुदने के लिए भी कहोगे.

ऐसा बोल कर वो मुस्कुराती हुई घुटनों पर बैठ गई और मेरे लंड को सहलाने लगी.


कुछ देर सहलाने के बाद वो अपने होंठों से मेरे लंड को सहलाने लगी.


मेरी आंख खुली, तो वो मुस्कुरा रही थी और अचानक उसने अपनी जीभ निकाल कर मेरे लंड के सुपारे पर फेर दी.


मुझे मानो तन्नुम आ गई. वो मेरे लंड को पूरा चाटने लगी. फिर पूरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.


मैं समझ गया कि ये कोई नई खिलाड़ी नहीं है, इसे इन सब चीज़ों का अच्छा अनुभव है.


मैं सोच ही रहा था कि गुल्लू ने मेरे पूरे लंड की इस कदर चुसाई शुरू कर दी कि मुझसे रहा नहीं गया.


मैंने सिसकते हुए कहा- आह उह, आह उह अब बस करो, मेरा निकलने वाला है.

गुल्लू ने कप को मेरे लंड के सुपारे पर रखा और मेरा लंड खाली होने लगा.


मेरे लंड में से इतना पानी कभी नहीं निकला था, जितना आज निकला.

वो कप शायद 15 मिलीलीटर से भी ज्यादा का था और वो पूरा भर गया था.


मेरे वीर्य की कुछ बूंदें तो गुल्लू की हाथों पर भी गिर गई थीं.


मैं हांफते हुए बैठ गया.

गुल्लू अपना मुँह और अपने हाथों को साफ करके रूम में से बाहर चली गई.


मैं भी थोड़ी देर में अपने कपड़े ठीक करके बाहर आ गया.

मेरे मन में एक अलग ही सुख था. मैं बहुत खुश था.


तभी सामने से गुल्लू दिखी, वो भी मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी.


वो मेरे पास आई और बोली- विक्रम तुम कल शाम को आना और अपनी रिपोर्ट ले लेना और साथ में दवा भी.

मैं उसकी तरफ परेशानी से देखने लगा.


वो मुझे एक प्यारी सी स्माइल देकर बोली- डोंट वरी, कुछ नहीं होगा. सब ठीक हो जाएगा.

मैंने भी कहा कि हां अब तो ठीक होना ही है. तुम जैसी प्यारी दोस्त जो मिल गई है मुझे.


वो बोली- मैं और दोस्त … वो कैसे?

जब उसने मुझसे ये कहा, तो मैंने कहा कि मैं अब तुम्हारे होंठों के लिए परेशान हो गया हूं.


वो मेरे इशारे को समझ गई और बोली- मैं भी अपने दोनों जगह के होंठों में तुम्हारा लंड लेने के लिए बेताब हो गई हूं.

मैंने कहा- किस तरह से इस बेताबी को खत्म किया जा सकता है?


उसने झट से एक कागज़ पर अपना फोन नंबर लिखा और मुझे पकड़ा दिया.

अभी मैं उससे कुछ कहता, वो अपनी गांड मटकाती हुई चली गई.


मैं उसके होंठों से हुई अपने लंड की चुसाई को याद करते हुए डाक्टर साहब के क्लीनिक से निकल आया.


शाम को मैंने उस कड़क लौंडिया के नंबर पर फोन लगाया.


उधर से उसकी सुरीली आवाज आई- हैलो!

मैंने कहा- मुँह में ले लो.


उसकी खिलखिलाती हुई आवाज आई- इतनी देर में मेरी याद आई!

मैंने कहा- मुझे लगा कि तुम किसी और का चूस रही होगी.


वो बोली- साले, रंडी समझा है क्या?

मैंने हंस कर उसे चुम्मा ले लिया.


वो बोली- अभी किधर है?

मैंने कहा- कमरे में लंड हिला रहा हूं.


वो बोली- मेरे पास आ जा.

मैंने कहा- पता भेज दे.


उसी समय मेरे मोबाइल पर किसी मैसेज के आने का नोटिफिकेशन आया.


मैंने कॉल हैंडफ्री की और उसके मैसेज को देखा.

मैंने उससे कहा कि दस मिनट में मैं तेरे पास पहुंच जाऊंगा.


वो बोली दरवाज़ा खुला मिलेगा, बिना दस्तक दिए अन्दर आ जाना.



मैं अगले दस मिनट में अपनी लैला के घोंसले में पहुंच गया था.


वो अपनी सहेली के साथ कमरा किराये पर लेकर रहती थी.


मैंने अन्दर आकर देखा तो लड़की एकदम नंगी खड़ी थी. मैंने झट से दरवाजा बंद किया और अपने कपड़े उतार फेंके.


इसके बाद हम दोनों के बीच चुदाई की जंग सी छिड़ गई.

जबरदस्त लंड चूत की चुसाई हुई और हम दोनों ने एक दूसरे का रस पी लिया.


वो मेरे लौड़े को छोड़ ही नहीं रही थी.

जल्द ही लंड कड़क हो गया और उसने मुझे अपने नीचे लिटा कर मेरे ऊपर चढ़ गई.


मैंने भी लौड़ा चुत में सैट कर दिया और धांए धांए फायरिंग शुरू कर दी.


बीस मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई में मैंने उसे लंड की सवारी कराई, कुतिया बना कर चोदा और अंत में जब वो मिशनरी पोजीशन में मेरे लौड़े से चुदी तो तेज तेज आवाज लेती हुई झड़ गई.


उसके झड़ने के बाद मैं भी उसकी चुत में झड़ गया.


इसके बाद उसने आवाज लगाई, तब उसकी सहेली पर्दे के पीछे से बाहर आ गई.


पहले तो मैं घबरा गया, फिर उसने कहा कि ये मेरी सहेली है, इसे भी रगड़ दो.


मैंने उसे भी अपनी बांहों में भर लिया और चूमने लगा.


इस नर्स सेक्स कहानी के अगले भाग में मैं आगे लिखूंगा कि डॉक्टर ने मुझे क्या बताया और नर्स की सहेली को कैसे चोदा.


आप मुझे मेरी इस सेक्सी नर्स सेक्स कहानी के लिए अपने मेल जरूर लिखें.

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