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पापा के सामने मेरी ब्लू फिल्म

 



हैल्लो साथियों, मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त है, जिसका नाम बलजीत है, जो भोपाल में ही अपनी बड़ी बहन और माँ के साथ रहता है और वो एक प्राइवेट बेंक में नौकरी करता है, उसके परिवार में सिर्फ़ तीन लोग है, एक बलजीत उसकी मम्मी और उसकी सिस्टर कामिनी. उसकी मम्मी की उम्र 48 साल है और बड़ी बहन 28 साल जिनकी शादी हो चुकी है और उनका पति पिछले पांच साल से जर्मनी में एक कंपनी में काम करता है.

साथियों जैसा कि आप लोग अच्छी तरह से जानते है कि गाँव में शादियाँ छोटी ही उम्र में हो जाती है और खासतौर पर लड़कियों की. उसकी मम्मी की भी 15 साल की उम्र में शादी हुई थी और इस तरह से मेरे दोस्त की बड़ी बहन की भी 18 साल की उम्र में शादी हो गयी थी.

साथियों उसकी बड़ी बहन का नाम रीना है. में और बलजीत कॉलेज के जमाने के पक्के दोस्त है और इसलिए हम दोनों अक्सर एक दूसरे के घर पर आते जाते रहते है, उसकी बड़ी बहन बहुत ही खुले विचार वाली महिला है और वो मुझे अपने भाई बलजीत की तरह ही मानती है और उस दिन शनिवार था और में अपने रूम में आराम कर रहा था कि रीना मेरे घर पर गई और वो अक्सर आती रहती थी और वो हमेशा मेरे लिए कुछ ना कुछ जरुर लेकर आती थी.

इसके बाद उस दिन भी वो बाजार से खरीददारी करके आई थी. रीना सिस्टर 28 साल की बहुत ही सुंदर और कामुक चेहरे वाली औरत है. उनका फिगर 38-28-36 है और उनकी गोरी उभरी हुई छाती और गांड को देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो सकता, जैसे ही वो मेरे रूम में आई तो मुझसे कहने लगी क्या बात है महेश आज कल तुम घर नहीं रहे हो? में बोला कि सिस्टर आज कल मुझे काम के सिलसिले में कई कई महीनो तक बाहर रहना होता है, इसलिए में नहीं सका. अब वो मुस्कुराते हुए बोली कि मुझे सब मालूम है कि तुम क्या काम करते हो? अच्छा चल अब मुझे पानी तो पिला दे.

अब मैंने उनसे कहा हाँ सिस्टर मुझे माफ़ करना, में अभी लाता हूँ और मैंने फ़्रीज़ से पानी की एक बोतल निकालकर उनको दी, जिसके बाद वो पानी पीकर बोली उउफफफफ्फ़ आज कितनी गरमी है. इसके बाद मैंने बोला कि हाँ सिस्टर और इसके बाद हम दोनों में ऐसे ही बातें होती रही. तब मैंने उनसे पूछा कि बलजीत और मम्मी कैसी है?

वो बोली कि वो दोनों तो आज सुबह ही गाँव गए है और में अकेली बोर हो रही थी, इसलिए में तुम्हारे पास चली आई और इतने में बाहर जोरदार बारिश होने लगी, जो बहुत देर तक चली और वो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी और यह देखकर सिस्टर अब बड़ी परेशान हो गयी और वो कहने लगी, अरे यार अब में अपने घर पर कैसे जाउंगी, आज तो यह पानी बिल्कुल भी कम नहीं होता दिखता? में उनसे बोला कि रीना सिस्टर अब जब तक यह बारिश नहीं रुक जाती है, तब तक आपको यहीं पर रुकना पड़ेगा और वैसे भी आप आज घर में बिल्कुल अकेली रहोगी, यहाँ पर मेरे साथ रहने से आपका समय भी पास हो जाएगा.

सिस्टर : लेकिन?

मैं : अरे सिस्टर हो सकता है, सुबह तक यह बारिश थम जाएगी आप तब चली जाना.

सिस्टर : लेकिन में यहाँ पर उफफफ्फ़ अब क्या करूँ?

इसके बाद मैंने उनसे पूछा क्यों क्या हुआ सिस्टर? वो बोली कि हुआ क्या अब तो मुझे यहाँ रुकना ही पड़ेगा और क्या? तो में पूछने लगा क्यों क्या हुआ? यहाँ पर आपको कौन सी परेशानी है? वो कहने लगी अरे यार, लेकिन में रात को क्या पहनूंगी? क्या तेरे पास और कपड़े है?

में बोला कि हाँ यह परेशानी तो है, आप मेरी लूँगी और कुर्ता पहन लेना तो वो बोली कि हाँ यही ठीक रहेगा, अच्छा खाने का क्या है? मैंने उनसे कहा कि खाना तो बनाना पड़ेगा सिस्टर. इसके बाद वो बोली कि हाँ चलो ठीक है, घर में दाल चावल तो होंगे, हम आज वही बना लेते है. इसके बाद मैंने कहा कि हाँ दाल चावल है और कुछ सब्ज़ियाँ भी है, जो फ़्रीज़ में रखी हुई है.

साथियों उस समय शाम के 8 बज चुके थे और अब सिस्टर रसोई में हम दोनों के लिए खाना तैयार कर रही थी और में टी.वी. देख रहा था.

तभी रीना सिस्टर ने मुझे आवाज़ देकर कहा महेश यहाँ तो , में उनके पास चला गया और बोला कि हाँ सिस्टर बताओ ना क्या बात है? तो वो पूछने लगी अरे घी कहाँ है? मैंने उन्हें घी का डब्बा दे दिया और में वहीं पर खड़ा हो गया और सिस्टर उस समय लूंगी और सफेद रंग के पतले कुर्ते में थी, जो कि उनके पसीने से भीग गया था, क्योंकि रसोई में बहुत गरमी थी और भीगी हुई लूंगी और कुर्ते से मुझे उनके बदन का सारा भूगोल नज़र रहा था और उनकी गांड को देखकर मेरे अंदर का शैतान जाग उठा, उनके कूल्हों का आकार, रंग देखकर पता चलता था कि उन्होंने अंदर पेंटी नहीं पहनी है उूउउफ़फ्फ़ यह सब देखकर मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया और मुझे बुरे बुरे विचार मन में आने लगे, लेकिन वो मेरे दोस्त की बड़ी बहन है, यह बात सोचकर में वापस अपने कमरे में जाने लगा.

इसके बाद वो बोली कहाँ जा रहे हो यहीं रहो ना? में अकेली बोर हो रही हूँ, चलो कुछ बातें करते है, खाना भी बन जाएगा और मुझे बौरियत भी नहीं होगी. इसके बाद मैंने कहा कि हाँ ठीक है सिस्टर और बताओ आपको यहाँ पर किसी बात की कोई परेशानी तो नहीं है? सिस्टर बोली कि नहीं मुझे कोई भी परेशानी नहीं है, में यहाँ पर बहुत आराम से हूँ, तुम्हारे दफ्तर के क्या हाल है? मैंने कहा कि जी एकदम ठीक है, में तो बस दफ़्तर जाता हूँ और घर पर रहता हूँ. इसके बाद उन्होंने मुझसे पूछा अच्छा महेश ज़रा तू मुझे एक बात सच सच बता? मैंने पूछा हाँ वो क्या सिस्टर?

सिस्टर : तू दफ्तर में अपने काम पर ध्यान देता है या लड़कियों पर?

मैं : क्या सिस्टर आप भी बस?

सिस्टर : क्यों क्या तेरे दफ्तर में कोई सुंदर लड़की नहीं है?

मैं : हाँ है सिस्टर, बहुत सी है, लेकिन में सिर्फ़ अपने काम पर ध्यान देता हूँ.

सिस्टर : चल हट तू मुझे ही बना रहा है, में बहुत जानती हूँ लड़कियों की किसी लड़के को देखकर उनकी क्या हालत होती है? और वो भी अगर लड़का तुम्हारे जैसे सुंदर हो तो.

मैं : हाँ, लेकिन में ऐसा नहीं हूँ.

सिस्टर : अच्छा चल कोई तो तुझे अच्छी लगती होगी?

मैं : नहीं सिस्टर.

सिस्टर : नहीं चल में नहीं मानती एक जवान लड़का जिसे कोई लड़की अच्छी नहीं लगती हो, यह हो ही नहीं सकता?

मैं : हाँ सिस्टर मुझे आप भी क्या कोई भी अच्छी नहीं लगती.

सिस्टर : ऐसा क्यों, क्या तू जावन नहीं है?

मैं : हाँ हूँ ना.

सिस्टर : क्या तुझमें कोई कमी है?

मैं : क्या सिस्टर आप भी बात कहाँ ले गई?

सिस्टर : में जवान भी हूँ और मुझमें कोई कमी भी नहीं है, लेकिन मुझे जवान लड़कियाँ अच्छी नहीं लगती.

सिस्टर : क्यों जवान लड़कियाँ क्यों नहीं?

अब जाने भी दो ना आप मेरी बड़ी बहन जैसी हो और बहन भाई में ऐसी बात हो जाती, अरे यार तुम शहर में रहते हो, 21 वीं सदी में जी रहे हो और तुम बातें कर रहे हो पुराने जमाने की, अरे पागल आज कल तो भाई बहन भी एक दोस्त की तरह होते है, जो आपस में अपने मन की सारी बातें एक दूसरे को बता देते है, बिना किसी शरम या झिझक के, अच्छा चल अब यह बता तू बियर वगेराह पीता है? तब मैंने बोला कि हाँ सिस्टर कभी कभी साथियों के साथ उनके कहने पर में भी पी लेता हूँ. इसके बाद उन्होंने पूछा क्या अभी है तेरे पास?

मैंने कहा कि हाँ सिस्टर फ़्रीज़ में चार बोतल है, क्या आप भी पीती हो? हाँ रे जब गरमी ज़्यादा होती है तो तेरे जीजा जी मुझे पिला देते है और कभी कभी तो वो मुझे व्हिस्की भी पीला देते है. इसके बाद मैंने कहा कि तुम बहुत बदल गई हो.

सिस्टर हंसते हुए बोली अरे बेटा यह सब शहर की हवा का असर है, में तुम्हारे जीजा के साथ पार्टियों में जाती हूँ तो मुझे पीनी पड़ती है और जितनी बड़ी पार्टियों में हम जाते है, वहां पर यह सब तो आम बात है कभी तू भी चलना हमारे साथ. इसके बाद मैंने कहा कि हाँ ठीक है सिस्टर अब आप नहा लो. इसके बाद हम बियर पीते हुए बातें करते रहेंगे, ठीक है कहकर वो अपनी गांड को हिलाती हुई नहाने चली गयी और में अपने लंड को पकड़कर मसल रहा था और सोच रहा था कि आज सिस्टर बड़ी फ्रेंक होकर बातें कर रही है, हो सकता है आज मुझे उनको चोदने का मौका मिल जाए? और में सोचने लगा कि रीना सिस्टर जब नहाकर मेरे लूँगी और कुर्ता बिना पेंटी के पहनेगी तो शायद आज रात को उसकी लूँगी हट जाए या खुल जाए तो उनकी चूत के दर्शन मुझे हो ज़ाए?

तभी सिस्टर नहाकर गई और मैंने तुरंत अपने लंड को अंडरवियर में अपनी जगह सेट किया और में बोला क्यों नहा ली सिस्टर? वो बोली कि हाँ अब तू भी नहा ले. इसके बाद में बोला कि जी हाँ ठीक है और में बाथरूम में आकर अपने कपड़े उतारकर जैसे ही कपड़े टाँगने के लिए खूँटी की तरफ बड़ा तो में हैरान रह गया कि सिस्टर की ब्रा और पेंटी वहाँ टंगी हुई थी, मुझे कुछ अजीब सा लगा.

इसके बाद मैंने सोचा कि शायद उन्होंने अपनी पेंटी को तब उतारी होगी, जब वो पहली बार पेशाब के लिए आई थी. इसके बाद मैंने वो पेंटी नीचे उतारकर अपने एक हाथ में ले लिया और में उसको सूंघने लगा, हाईईईई साथियों सच कहता हूँ उसकी चूत की महक से में बिल्कुल पागल हो गया और में मुठ मारने लगा, जब मेरा लंड झड़ गया, तो में जल्दी से नहाकर बाहर गया.

इसके बाद सिस्टर ने मुझसे पूछा क्यों बड़ी देर लगा दी तुमने नहाने में? में घबरा गया और बोला वो सिस्टर गरमी बहुत है ना और वो कहने लगी अच्छा चल अब बियर खोल.

इसके बाद मैंने दो बोतल बियर खोली और एक उनको दे दी और एक खुद ने ले ली और सिस्टर बेड पर अपने दोनों पैरों को लंबा करके सिरहाने से अपनी पीठ को लगाकर बैठी हुई थी, में उनको गौर से देखने लगा.

इसके बाद वो मुझसे बोली क्या बात है महेश तू मुझे ऐसे क्या देख रहा है? में यह बात सुनकर सकपका गया और बोला कि कुछ नहीं सिस्टर में देख रहा था कि आप मेरे कपड़ों में बहुत अच्छी लग रही हो.

सिस्टर : अच्छ बेटा तुझे तो लड़कियाँ अच्छी ही नहीं लगती, तो इसके बाद में कैसे तुझे अच्छी लगने लगी?

मैं : अओहूओ सिस्टर आप कोई लड़की थोड़े ही हो कहकर में चुप हो गया.

सिस्टर : अरे में लड़की नहीं तो क्या कोई मर्द हूँ?

मैं : अरे नहीं सिस्टर, मेरा वो मतलब नहीं था.

सिस्टर : तो इसके बाद क्या था?

मैं : अओहूऊओ अब में आपको कैसे बताऊं आप मेरी बड़ी बहन जैसी हो?

सिस्टर : अरे यार इसके बाद वही ढकियानूसी बातें, अरे अब हम दोस्त है, देख तू मेरे साथ बियर पी रहा है और अब मुझसे कैसी शरम तू खुलकर बोल में बुरा नहीं मानूगी, वो अपनी बियर की बोतल खाली करके बोली, सिस्टर इसके बाद मुझसे बोली कि, लेकिन पहले दूसरी बोतल खोलकर तू मुझे दे दे.

इसके बाद मैंने कहा कि हाँ ठीक है, सिस्टर पूछने लगी क्यों तू और नहीं लेगा? मैंने कहा हाँ लूँगा सिस्टर, लेकिन पहले अगर आप नाराज़ ना हो तो में एक सिगरेट पी लूँ? मेरी बात को सुनकर वो पालती मारकर बैठ गई और बोली कि धत इसमें नाराज़ होने वाली कौन सी बात है? ला एक मुझे भी दे. अब में उनकी यह बात सुनकर बड़ा हैरान रह गया.

इसके बाद मैंने चकित होकर पूछा क्या आप भी? सिस्टर बोली हाँ कभी कभी, लेकिन आज सोचा क्यों ना आज तेरे साथ मस्ती मारूं? मैंने एक सिगरेट उनको देकर एक खुद सुलगा दी और कश खींचने के बाद बियर का घूँट भरकर सिस्टर मुझसे बोली हाँ अब तू बोल. अब तक साथियों में उनसे बहुत खुल चुका था, इसलिए अब मेरा डर कुछ कम हो चुका था, में बोला वो क्या है कि सिस्टर आप तो शादीशुदा हो और मुझसे बड़ी उम्र की मतलब 28 से ज्यादा की औरतें अच्छी लगती है और मुझे 45-50 की सुडोल भरे हुए बदन वाली भी अच्छी लगती है और अब सिस्टर हैरानी से मेरी तएफ़ देख रही थी, बियर का एक घूँट लेकर वो पूछने लगी, लेकिन भाई 45-50 की तो बूढ़ी होती है, अच्छा यह बताओ अपने से बड़ी उम्र की औरतों में तुम्हें ऐसा क्या नज़र आता है, जो तुम्हें वो अच्छी लगती है?

अब मैंने कहा कि सिस्टर में सोचता हूँ कि खैर आप जाने दो वरना आप बुरा मान जाओगी, मेरे विचार जानकर आप सोचोगी कि में कितना गंदा हूँ? तो सिस्टर कहने अरे नहीं यार हर आदमी की अपनी एक पसंद होती है और अब तो तुम्हारी बातों में मुझे भी बहुत मज़ा रहा है, बोलो ना प्लीज बताओ? वो मेरे हाथ पकड़कर बोली. इसके बाद मैंने कहा कि सिस्टर बड़ी उम्र की लेडी का बदन खासकर उसके कूल्हे और छाती बहुत भरे हुए होते है, मुझे बड़े कुल्हे और छाती वाली अच्छी लगती है.

इसके बाद वो बोली अरे यार हिन्दी में बताना कि तुझे बड़े कूल्हे और बूब्स वाली पसंद है, तो में उन्हें देखता रह गया और उनके मुहं से सुनकर मेरे लंड ने ज़ोर का झटका दिया. इसके बाद मैंने उनसे कहा कि सिस्टर आज आप मुझे पूरा बेशरम बनाकर छोड़ोगी. अब वो झूमते हुए कहने लगी दोस्त बेशरमी अच्छी होती है और पागल दिल की कोई भी बात छुपानी नहीं चाहिए, तूने कभी किसी बड़ी उम्र की औरत के साथ कुछ किया भी है या बस विचारों में ही. इसके बाद मैंने कहा नहीं सिस्टर अब तक तो कोई नहीं है. इसके बाद वो बोली कि मेरे प्यारे भाई इसके बाद तू क्या करता है? मैंने बोला कि कुछ नहीं बस ऐसे ही काम चला लेता हूँ.

सिस्टर : यानी अपना हाथ जगन्नाथ क्यों?

मैं : धत हाँ में शरमाते हुए बोला.

सिस्टर : क्यों रोज़ाना या कभी कभी?

मैं : कभी कभी सिस्टर.

सिस्टर : हाँ ठीक है रोज़ाना नहीं करना चाहिए, उससे सेहत खराब हो जाती है.

मैं : लेकिन क्या करूँ सिस्टर कंट्रोल ही नहीं होता, जब भी कोई 28-35 की सुंदर सी औरत देखता हूँ, मेरा जी मचल उठता है और अब तो और बुरा हाल है, अब तो किसी रिश्तेदार की औरत को देखकर भी बुरा हाल हो जाता है, इसलिए में अब तुम्हारे यहाँ भी नहीं आता.

सिस्टर : क्यों मेरे यहाँ कौन है? में हूँ माँ और बलजीत है.

मैं : सच बोलूं?

सिस्टर : हाँ भाई बोल?

मैं : आप और आपकी माँ की वजह से.

सिस्टर : क्या तुझे में भी और मेरी माँ इतनी अच्छी लगती है, तू हम माँ बेटी के बारे में क्या सोचता है?

साथियों अब मेरी तो गांड ही फट गयी. इसके बाद मैंने कहा कि सिस्टर मैंने तो पहले ही कहा था आप बुरा मान जाओगी, तो वो बोली कि अरे नहीं मेरे प्यारे भाई में तो सोचकर हैरान हूँ कि अब भी मुझमें ऐसी क्या बात है, जो तुम जैसा जवान लड़का मुझे इतना पसंद करता है बताओ ना प्लीज? में बोला क्या में सच में बताऊं सिस्टर? वो बोली अरे यार हाँ अब बोल भी.

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