Ad Code

पहले प्यार का पहला पल

 पहले प्यार का पहला पल




हैल्लो साथियों, में एक डोरस्टेप सर्विस कंपनी के ऑफीस में काम करता हूँ. मेरी उम्र 25 साल है, में दिखने में काफ़ी स्मार्ट तो नहीं, लेकिन खूबसूरत हूँ. में रोज नये-नये कपड़े पहनता हूँ. हमारी डोरस्टेप सर्विस कंपनी बुक किए गये बड़े-बड़े पार्सल और अन्य सामान को रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डे पर बुकिंग कराकर देश-विदेश के अन्य शहरों में पहुँचाती है और कभी-कभी में भी गाड़ी में भरे सामान को लेकर स्टेशन पर आता जाता था.

हमारी कंपनी में करीब लगभग 60 लड़के-लड़कियाँ और महिलाए काम करती है. हमारी कंपनी में सविता भी काम करती थी और उसकी उम्र करीब 20 साल थी. वो कंपनी में बुकिंग क्लर्क के पद पर काम करती थी, वो काफ़ी फैशनेबल लड़की थी, वो भी रोज नई-नई ड्रेस पहनकर आती थी और उसका चेहरा काफ़ी आकर्षक था, उसकी काली-काली झील जैसी गहरी और चमकर आँखों को देखकर कोई भी उसे पाने की चाहत कर सकता था.

उसकी सुरहीदार गर्दन और बालों का जुड़ा ऐसा लगता था जैसे कि मोरनी के सिर पर कलंगी लगी हो, वैसे तो उसके बाल इतने लंबे थे कि कमर के नीचे तक लटके रहते थे मगर वो ज्यादातर जूड़ा ही बाँधती थी और बालों की चोटी बनाती थी, तो चलते समय उसके बाल उसके कूल्हों से बारी-बारी टकराते रहते थे, वो अपने कपड़ो की तरह बालों को भी रोज-रोज नये-नये तरीके से बनाकर आती थी. जब वो बात करती थी तो उसकी सुरीली और खनकदार आवाज सुनकर ऐसा लगता था कि बस वो बोलती ही रहे और उसके कुर्ते के भीतर उसकी ब्रा में कसे मध्यम आकर के बूब्स और उनके नुकीले निप्पल ऐसे खड़े रहते थे जैसे हिमालय की दो नुकीली चोटियाँ शान से अपना सिर ऊपर उठाए खड़ी हो और उसकी कमर के तो कहने ही क्या थे? जब वो चलती थी तो ऐसा लगता था जैसे कोई मस्त हिरनी चल रही हो, उसका सिर से पैर तक संपूर्ण जिस्म बेहद आकर्षक और खूबसूरत था.

अब जब मैं भी सविता को देखता था तो उसका दिल उलझने लगता था मगर काम के चक्कर में मुझे सवि



ता से बात करने का मौका बहुत ही कम मिलता था. बस सविता से मेरी हाए हैल्लो ही हो पाती थी. में सविता से बात करने और उससे घुलने-मिलने के चक्कर में तो बहुत रहता था, लेकिन काम ज्यादा होने के कारण में लेट नाईट तक ऑफीस में ही रुकता था.

सच तो यह था कि सविता मुझे अच्छी लगती थी, मैं उस पर मरता था और उसे अपना बनाकर शादी करना चाहता था. में यहाँ अपनी फेमिली के साथ रहता हूँ और सविता वसाई में रहती है, उसके माता-पिता के अलावा उसकी और एक छोटी बहन है. इसके बाद जब में सुबह 10 बजे ऑफीस जाता, तो सविता से एक बार जरूर हाए हैल्लो करता.

सविता और सारे स्टाफ का टाईम टेबल सुबह 10:30 बजे से शाम 6:30 बजे तक रहता था, लेकिन काम ज्यादा होने पर कभी-कभी स्टाफ को ओवर टाईम भी करना पड़ता था जैसे सभी ऑफिस में स्टाफ में आपस में बातचीत होती है और हल्का फुल्का हंसी मज़ाक चलता रहता है, वैसे ही सविता और मेरे बीच में चलता रहता था, लेकिन सविता को मेरे दिल की अंदर की बात मालूम नहीं थी. वैसे में सविता को दिल से बहुत अच्छा लगता था.

इसके बाद एक दिन लंच का समय था, अब सभी स्टाफ अपना-अपना लंच बॉक्स निकालकर खाना खाने की तैयारी में था. अब सविता भी खाना खाने बैठने ही जा रही थी की में वहाँ पहुँच गया और इसके बाद मैंने कहा कि अरे वाह आज तो में सही टाईम पर गया. तो तभी सविता ने निवाला तोड़ते हुए कहा कि हाँ-हाँ आओ ना. अब में सविता की टेबल के सामने स्टूल लगाकर बैठ गया था और इसके बाद मैंने सविता की तारीफ करते हुए उसके लंच बॉक्स में से एक रोटी निकालकर खाते हुए कहा कि वाह क्या मस्त खाना है? मज़ा गया. इसके बाद तभी सविता ने खाना खाते हुए कहा कि क्या खाक मज़ा आएगा, में ये साधारण खाना तो रोज लेकर आती हूँ.

इसके बाद मैंने कहा कि में झूठ नहीं बोल रहा हूँ और मैंने इसके बाद से खाने की तारीफ़ करते हुए कहा कि खाना बहुत अच्छा है और इसके बाद मैंने अपनी रोटी ख़त्म कर ली और थैंक यू कहा और चलने लगा. इसके बाद तभी सविता ने अपना लंच बॉक्स मेरी तरफ सरकाते हुए कहा कि अरे और खाइए ना, एक रोटी से क्या होता है? तो में बस बहुत हो गया कहकर उठ गया.

इसके बाद मैंने हाथ धोए और सविता के पास आकर बोला कि अच्छा सविता में चलता हूँ. इसके बाद सविता ने भी मुस्कुराते हुए कहा कि ओके बाए-बाए. इसके बाद उस दिन के बाद से जब भी ऑफिस में हम दोनों का आमना सामना होता, तो हम दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा देते और हालचाल पूछ लेते थे. इसके बाद एक दिन में सविता के पास जाकर बोला कि आज तुम्हारे साथ बैठकर चाय पीने की इच्छा हो रही है. इसके बाद उसने कहा तो पी लेंगे, मैंने कब मना किया है?

और इसके बाद मैंने हमारे चपरासी को आवाज़ दी और इसके बाद हम चाय पीते-पीते बात करने लगे. अब हम दोनों चाय पी रहे थे.

इसके बाद मैंने पूछा कि सविता तुम कहाँ रहती हो? तो उसने कहा कि वसाई में, तो मैंने कहा में भी विरार में रहता हूँ. इसके बाद मैंने पूछा कि तुम्हारे घर में कौन-कौन है? तो उसने कहा कि मम्मी-पाप और एक छोटी बहन है, वो अभी पढ़ रही है, तो तब चाय ख़त्म हो गयी थी.

इसके बाद उस दिन के बाद से हम दोनो में नजदीकियां बढ़ गयी. अब हमें जब भी कोई मौका मिलता तो हम दोनों आपस में बहुत बातें करते थे. अब ऐसे दिन बीत रहे थे और इसके बाद हम दोनों की दोस्ती कब प्यार में बदल गयी, हमें पता ही नहीं चला. इसके बाद एक दिन में उसे मूवी दिखाने लेकर गया और थियेटर में उसके साथ रोमॅन्स किया, लेकिन सविता ने मुझे ऊपर से नीचे तक आने ही नहीं दिया. इसके बाद एक दिन में उसे लेकर लॉज में चला गया. अब हम दोनों अपनी कसर निकालने के लिए दोनों ही बैचेन थे. इसके बाद हमने रूम में प्रवेश किया, तो सविता मुझसे पलंग पर लिपट पड़ी. इसके बाद मैंने अपने जूते निकाल दिए और सविता को अपनी बाँहों में भर लिया.

इसके बाद में सविता के चेहरे को अपने दोनों हाथों में थामकर उसके गालों पर कई चुंबन ले डाले और मेरे चुंबन लेने के बाद मैंने ऊपर से ही सविता के बूब्स पर अपने हाथ रख दिए और उनसे खेलने लगा. इसके बाद मैंने सविता के होंठो का रसपान किया. अब सविता भी मेरा पूरा सहयोग दे रही थी.

इसके बाद जब सविता के होंठो का रसपान करके मेरा मन भर गया. तो तब सविता ने अपनी ड्रेस और ब्रा उतार दी, तो इसके बाद में भी निवस्त्र हो गया. सविता का यह पहला मौका था, अब बंद कमरे में दूधिया उजाले में मैंने भी पहली बार किसी स्त्री का संपूर्ण बदन देख लिया था. अब सविता का भी यह पहला मौका था, आज उसका पाला मुझसे पड़ा था.

थोड़ी ही देर में हम दोनों बेकरार हो गये, अब दोनों की साँसे तेज हो गयी थी और हमारे स्वर से पूरा कमरा गूंजने लगा था. अब हम दोनों के भीतर का तूफान जैसे-जैसे आगे बढ़ता जा रहा था वैसे-वैसे हम दोनों की स्पीड बढ़ती जा रही थी.

अब सविता काफ़ी उत्तेजित हो गयी थी तो उसने मेरी कमर कसकर पकड़ ली. अब हम दोनों अपनी मंज़िल पाने की भरपूर कोशिश करने लगे थे. इसके बाद थोड़ी ही देर में आनंद के सागर में तैरते हुए हम दोनों किनारे पर पहुँच गये. अब में ज़ोर-ज़ोर से साँसे भर रहा था, अब सविता की साँसे भी ज़ोर-ज़ोर से चल रही थी. अब सविता उस दिन लड़की से औरत बन गयी थी, उसकी कच्ची कली फूल बन गयी थी.

इसके बाद हम दोनों एक दूसरे से अलग हुए तो हम दोनों के चेहरे पर संतोष का भाव था. अब हम दोनों की बीच की दीवार ढल चुकी थी. इसके बाद हम दोनों आराम से पलंग पर लेट गये और में इसके बाद से सोते-सोते सविता के नाज़ुक अंगो से इसके बाद से छेड़छाड करने लगा. इसके बाद तभी सविता ने मेरा हाथ अपने नाज़ुक अंग से हटाते हुए कहा कि अब नहीं प्लीज, इसके बाद कभी. इसके बाद हमें जब कभी भी कोई मौका मिला, तो हमने उस मौके का भरपूर फायदा उठाया और खूब बुर का मजा किया.

Close Menu